राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी कि तुलना सद्दाम हुसैन और गद्दाफी से की , जानिए कौन है सद्दाम हुसैन गद्दाफ़ी...
काग्रेंस नेता व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी कि फैकल्टी और छात्रों के साथ वर्चुअल मीटिंग कर रहे थे .जब राहुल गांधी से अतर्राष्ट्रीय संस्थानों कि रिपोर्ट से जुड़ा सवाल पूछा गया तो राहुल गांधी ने भारत की लोकतांत्रिक स्थिति को कम करके बताया था कुछ दिन पहले स्वीडन के वी-डेम इंस्टीट्यूट कि डेमोक्रेसी रिपोर्ट ने कहा था कि 'भारत अब बहुत दिनों तक लोकतांत्रिक देश नहीं रहेगा'.
राहुल गांधी क्या बोला-
मेरे विचार से जितना वो सोच रहे हैं हालात उससे कहीं ज्यादा खराब है, ये पहली बात हैं. दुसरी बात ये है कि आप चुनावी लोकतंत्र को संस्थागत फ्रेमवर्क से अलग नहीं कर सकते. चुनाव का मतलब बस ये नहीं होता कि लोग जाएं और वोटिंग मशीन में बटन दबा आए .
एक चुनाव में नैरेटिव होता है, चुनाव संस्थानों के तहत होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि देश का ढांचा ठीक तरह से काम करे ,चुनाव न्याय व्यवस्था को पारदर्शी करने के लिए होता है, चुनाव संसद में होने वाली बहस के लिए होता है तो ये तमाम चीजें मिलकर आपके वोट को अहम बनाती हैं,
सद्दाम हुसैन और गद्दाफी भी चुनाव लङते थे,वो भी जितते थे वो भी वोट करते थे, ऐसा नहीं कि वो वोट नहीं करते थे लेकिन वहां कोई संस्थागत ढाचा नहीं था जो उस वोट को सुरक्षित करे.तो मेरे विचार से बाहरी संस्थाएँ क्या सोचती हैं, भारत को इससे ज्यादा अपने बारे में सोचना होगा .
पलटवार मे केंद्रीय मंत्री जावङेकर ने क्या बोला'-
भारत के केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राहुल गांधी के बयाए को करोड़ों भारतीयों का अपमान बताया .
कोन हैं सद्दाम हुसैन-
सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937, को इराक के अल अवजा गांव में हुआ था उनके मजदूर पिताजी उनके जन्म से पहले ही दिवगंत हो चुके थे उनकी मां ने अपने देवर से शादी कर ली थी लेकिन बच्चे की परवरिश कि खातिर उसे जल्द ही तीसरे व्यक्ति से शादी करनी पड़ी इन परिस्थितियों ने सद्दाम को बचपन में ही भयानक रूप से मजबूत और निर्दयी बना दिया अपनी सुरक्षा के लिए सद्दाम हमेशा अपने पास एक लोहे की छङ रखता था
किशोरावस्था में कदम रखते ही वह विद्रोही हो गया और ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए चल रहे राष्ट्रीय आदोंलन मे कूद पड़ा हालांकि पश्चिम के कुछ अखबार इस आदोंलन को बदमाशों की सेना कहते थे, 1956 मे वह बाथ सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए ये पार्टी अरब साम्यवादी विचारों की वाहक फौज थी

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