भारत का ई-पासपोर्ट: सुरक्षा, चिप और पुराने पासपोर्ट को लेकर 5 बड़े अपडेट
भारत का नया ई-पासपोर्ट: 5 ऐसी बातें जो हर यात्री को जाननी चाहिए
परिचय: आपका पासपोर्ट अब 'स्मार्ट' हो गया है
हाल ही में भारत के नए ई-पासपोर्ट को लेकर काफी चर्चा हो रही है। मई 2025 में पूर्ण रूप से लागू होने के बाद से अब तक लाखों ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं, जो इस बदलाव की तीव्र गति को दर्शाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बदलाव का आपकी यात्रा, सुरक्षा और आपके पुराने पासपोर्ट के लिए वास्तव में क्या मतलब है? हर कोई चिप वाले पासपोर्ट की बात कर रहा है, लेकिन इसकी बारीकियां अक्सर सुर्खियों में खो जाती हैं। यह लेख आपको इस तकनीकी अपग्रेड के बारे में सबसे आश्चर्यजनक और महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में बताएगा, ताकि आप केवल बुनियादी जानकारी से आगे बढ़कर इसे पूरी तरह समझ सकें।
- भारत का ई-पासपोर्ट क्या है?
- ई-पासपोर्ट में लगी चिप कैसे काम करती है?
- ई-पासपोर्ट से सुरक्षा कैसे बढ़ेगी?
- क्या पुराने पासपोर्ट बदलना जरूरी है?
- आम यात्रियों को क्या फायदे होंगे?
1. आपको अपना पुराना पासपोर्ट बदलने की कोई जल्दी नहीं है
सबसे आम सवालों में से एक यह है कि क्या आपको अपना मौजूदा पासपोर्ट तुरंत एक नए ई-पासपोर्ट से बदलना होगा। इसका सीधा सा जवाब है: नहीं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा, बिना चिप वाले पासपोर्ट अपनी समाप्ति तिथि तक पूरी तरह से वैध रहेंगे। समय से पहले बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, भारत ने 2035 का लक्ष्य रखा है, जब तक प्रचलन में मौजूद सभी भारतीय पासपोर्ट चिप-आधारित ई-पासपोर्ट होने की उम्मीद है। इसलिए, आप आराम से रह सकते हैं और अपने वर्तमान पासपोर्ट का उपयोग तब तक कर सकते हैं जब तक वह वैध है।
2. यह गति से ज़्यादा सुरक्षा के बारे में है (अभी के लिए)
हालांकि तेज इमिग्रेशन को एक प्रमुख लाभ के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन तत्काल और प्राथमिक लाभ धोखाधड़ी और जालसाजी के खिलाफ बढ़ी हुई सुरक्षा है। वास्तविक गति में सुधार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-गेट्स की उपलब्धता और भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए नियमों पर निर्भर करता है। जब किसी मानव अधिकारी से निपटना होता है, तो चिप डेटा को पढ़ना पासपोर्ट स्कैन करने से केवल मामूली रूप से तेज होता है।
एक ऑनलाइन फ़ोरम में एक उपयोगकर्ता ने इस बात पर जोर दिया:
"अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक पासपोर्ट की असली उपयोगिता धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है, क्योंकि चिप को पासपोर्ट के डेटा पेजों की तुलना में नकली बनाना कठिन माना जाता है। 'गति' कभी भी किसी भी देश द्वारा बायोमेट्रिक पासपोर्ट विकसित करने का प्राथमिक उद्देश्य नहीं था, भले ही प्रचार में इस पर जोर दिया जाता हो।"
ई-पासपोर्ट को सबसे पहले एक मूलभूत सुरक्षा अपग्रेड के रूप में देखें, जिसके गति लाभ एक ऐसी क्षमता है जो वैश्विक बुनियादी ढांचे के अनुकूल होने के साथ-साथ बढ़ेगी।
3. आपके पासपोर्ट को ट्रैक नहीं किया जा सकता
एक आम चिंता यह है कि एम्बेडेड RFID चिप का उपयोग आपको ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है। यह एक मिथक है। अधिकारियों ने इस चिंता को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि चिप को ट्रैक नहीं किया जा सकता है।
आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार: "चिप को ट्रैक नहीं किया जा सकता; यह केवल इमिग्रेशन काउंटरों पर मशीन द्वारा पढ़े जाने पर ही सक्रिय होता है।" चिप आपके जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक डेटा को केवल-पढ़ने के प्रारूप (read-only format) में संग्रहीत करता है, जिससे यह सुरक्षित रहता है और किसी भी प्रकार की ट्रैकिंग को असंभव बना देता है।
4. सरकार अतिरिक्त लागत वहन कर रही है (फिलहाल)
यह शायद सबसे आश्चर्यजनक तथ्यों में से एक है। ई-पासपोर्ट के उत्पादन की लागत पारंपरिक पासपोर्ट की तुलना में अधिक होने के बावजूद, विदेश मंत्रालय वर्तमान में अतिरिक्त खर्च वहन कर रहा है।
इसका मतलब है कि आवेदकों के लिए पासपोर्ट शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि वे "आवश्यकता पड़ने पर ही शुल्क में संशोधन की जांच करेंगे," जिसका अर्थ है कि यह भविष्य में बदल सकता है। लेकिन अभी के लिए, आपको इस तकनीकी अपग्रेड के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ रहा है।
5. चिप में आपकी सोच से कहीं ज़्यादा तकनीक है
ई-पासपोर्ट में सिर्फ एक साधारण चिप नहीं है; इसमें उन्नत तकनीक की कई परतें शामिल हैं जो इसे अविश्वसनीय रूप से सुरक्षित और शक्तिशाली बनाती हैं।
* एंबेडेड RFID चिप: इसमें 64 किलोबाइट की मेमोरी होती है और इसमें धारक का बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रूप से संग्रहीत होता है। यह चिप बिना संपर्क के पढ़ी जा सकती है, जिससे हवाई अड्डों पर स्वचालित गेटों के माध्यम से तेजी से पहचान संभव हो पाती है।
* बायोमेट्रिक डेटा: इसमें फिंगरप्रिंट, एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीर और कुछ मामलों में आइरिस स्कैन शामिल है, जो पहचान को लगभग अचूक बनाता है। यह डेटा सुनिश्चित करता है कि पासपोर्ट का उपयोग केवल उसका असली धारक ही कर सकता है, जिससे प्रतिरूपण (impersonation) लगभग असंभव हो जाता है।
* अंतर्राष्ट्रीय मानक: यह अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के दिशानिर्देशों का पालन करता है, जिससे यह विश्व स्तर पर स्वीकार्य है। इस मानक का पालन करने का अर्थ है कि भारतीय ई-पासपोर्ट दुनिया भर के 120 से अधिक देशों में स्वीकार्य और पठनीय है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुगम होती है।
* डिजिटल सुरक्षा: यह धोखाधड़ी को रोकने के लिए पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (PKI) जैसी एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग करता है और इसमें एक यूनिक डिजिटल सिग्नेचर होता है। PKI तकनीक सुनिश्चित करती है कि चिप पर मौजूद डेटा के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है और यह उसी प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया है जिस पर भरोसा किया जाता है, जो एक डिजिटल ताले की तरह काम करता है।
निष्कर्ष: यात्रा का एक नया अध्याय
संक्षेप में, भारत का ई-पासपोर्ट केवल एक तकनीकी अपग्रेड से कहीं बढ़कर है। यह सुरक्षा को गति से आगे रखने का एक रणनीतिक कदम है, यह एक आश्वासन है कि आपकी गोपनीयता सुरक्षित है, और यह एक सुखद आश्चर्य है कि इसकी उन्नत तकनीक के लिए फिलहाल आपसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। यह भारतीय यात्रा दस्तावेजों के लिए एक नए, अधिक सुरक्षित अध्याय की शुरुआत है।
जैसे-जैसे भारत डिजिटल पहचान को अपना रहा है, यात्रा को वास्तव में सहज और सुरक्षित बनाने में अगला बड़ा कदम क्या होगा?
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